आस

लागली ग आज पहा, धार पाऊस संतत, तुला जमेना यायला, हीच मनी आहे खंत... [ Read more on https://adisjournal.com/aas/ ]

सोहळा

Beauty of our mother earth always shows variety of shades, but as soon as the month of Shravan comes around, beautiful wet greenery shining sunshine spreads all over. This poem is all about this gorgeous beauty of Nature.

बारीश और तुम #३

धुँवाधार बारिश है ये, थमने का कुछ नाम नही, पहाडोसे बिछड़नेपर, शायद फुटके रो रही। हम तुम भी तो बिछड़े है, महीनोसे ना मिल पाए, इन बरसते बादलसीही, क्या तुमभी बेहाल हो? जब हवा बादल उड़ा लाई, तबसे ये है जान गए, मुलाकात अब पहाड़की, अगले साल ही नसीब है। ये कंबख्त नौकरी जब, दूरी हममें डालती है, आहे... Continue Reading →

बारीश और तुम #२

कल रातकी बारिश कुछ बूंदे छोड गयी है, वहा खिडकीकी चौखटपर , मेरी कलाई की घडी मे फसी तुम्हारे कुर्तेके कुछ रेशमी धागों जैसी। मेरे कंधेपे सर रखकर अपनी उँगलिसे मेरे सिनेपे तुमने जो लिखे थे, वो अल्फाज अपने नाजुक हाथोंमें समेटे, देखो वो पल घूम रहे है मेरे इर्दगिर्द। जालीम हवा झोका कुछ बुंदोंको... Continue Reading →

बारीश और तुम #१

A post shared by aditya (@adisjournal) on Jun 20, 2017 at 2:21am PDT हर पल जब असमान से कुछ बुंदे मेरे उपर गिरती है, दिल के किसीं कोनेसे तुम्हारी आवाज आती है। मेरा गिला बदन तुम्हारी यादोसे मेहेकता है, मानो महिनोसे झुलसे हुए मिट्टीपे पेहेली बारिश गिरी है। कभी बिजली कडकती है, और मै भी... Continue Reading →

Table for two

It’s 9-30 am, first Sunday of August. Hakuna Matata is a cozy little place on the busiest part of the town. It’s famous in the town for their delicious breakfasts and amazing coffee. Being early Sunday morning, streets are rather quiet. As luck would have it, it’s drizzling. Just like a year ago. Kishore is... Continue Reading →

वणवा

या वैशाख वणव्याची नाही सोसत काहिली काळ्या मेघांच्या छायेची वाट साऱ्यांनी पाहिली. वाट पाहून पाहून पाणी डोळ्यांचे आटले. निसर्गाचे चिडले मन तेव्हा कुठे ते द्रवले.

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