सड़कके किनारे…

मई की भरी दोपहर में, जब चलता हु उन तपती मैली सड़कोपर, मनमे ख़याल आता है, कई हस्तियाँ चली होंगी, उम्र से लम्बी इन सड़कोपर.. कई सपने चूर होक बिखरे होंगे, इसकी धुंदलीसी गलियोंके हर मोड़ पर, किसीने उम्मिदकी किरणका हात थामे, यहिंसे मंझिलकी ओर कदम बढाया होगा. किसी मजनूने हसी राज बांटे होगे, इसी…

आस

लागली ग आज पहा, धार पाऊस संतत,
तुला जमेना यायला, हीच मनी आहे खंत…

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श्रावण

My new poem about gorgeous lover drenched in the showers of Shravan; the 5th month of Hindu calendar.