Adi's Journal

Pieces of my thourhgs

बुढ़ापा

A Hindi poem about an old home which is dilapidated. #poetrylove

हर रोज़ सुबह जब मैं मेरे कमरेकी खिड़की खोलता हूँ,
तो यही एक सवाल हमेशा होता है।
के ये कौन है जो एक आंखसे हमेशा मुझको तांकते है।

लगन

है अगर दिलमे कोई लगन अपने, उठ खड़ा हो, कर पुरे सारे सपने. हो हिम्मत अगर जिगरमे तेरी, भर तू ताकत अपने पंखोमे पूरी. नहीं

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