सूर

कधीकधी आठवण येते त्या बंदीशींची, त्या सुरांची ज्यात माझं मन पार बुडून गेलेलं असायचं.... There's a music everywhere, even in relationships. How? just read this poem. Hope you will enjoy it.

आठवण

आजची कविता वार्धक्याच्या वळणावरच्या प्रेमाची, विरहाची, आपुलकीची. तुम्हाला नक्की आवडेल. आवडली तर लाईक, कॉमेंट आणि शेअर करायला विसरू नका. Today's poem is about love, longing and affection at the last mile of life. Hope you will enjoy. Don't forget to like, comment and share if you enjoy the poem.

मुख़्तसरसी बात है…

मुख़्तसरसी बात है, तू जो सूनले तो मैं केह दु। तेरी होठोंकी लालिसे, और आँखोंकी गहराईपे, ना कोई नझ्म लिख दु, मुख़्तसरसी बात है... [Read more]

आस

लागली ग आज पहा, धार पाऊस संतत, तुला जमेना यायला, हीच मनी आहे खंत... [ Read more on https://adisjournal.com/aas/ ]

बारीश और तुम #३

धुँवाधार बारिश है ये, थमने का कुछ नाम नही, पहाडोसे बिछड़नेपर, शायद फुटके रो रही। हम तुम भी तो बिछड़े है, महीनोसे ना मिल पाए, इन बरसते बादलसीही, क्या तुमभी बेहाल हो? जब हवा बादल उड़ा लाई, तबसे ये है जान गए, मुलाकात अब पहाड़की, अगले साल ही नसीब है। ये कंबख्त नौकरी जब, दूरी हममें डालती है, आहे... Continue Reading →

बारीश और तुम #२

कल रातकी बारिश कुछ बूंदे छोड गयी है, वहा खिडकीकी चौखटपर , मेरी कलाई की घडी मे फसी तुम्हारे कुर्तेके कुछ रेशमी धागों जैसी। मेरे कंधेपे सर रखकर अपनी उँगलिसे मेरे सिनेपे तुमने जो लिखे थे, वो अल्फाज अपने नाजुक हाथोंमें समेटे, देखो वो पल घूम रहे है मेरे इर्दगिर्द। जालीम हवा झोका कुछ बुंदोंको... Continue Reading →

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