यादे

जब कोई निकल पडे उस मकाम कि ओर;

जहांसे नाही कोई राह वापसी कि ओर.
छोड जाता है पीचे सिर्फ दो चीजे;
आंखो मी आसू और दिल में यांदे
ये आंसू भी बडे गद्दार होते है;
बस चंद दिनोंके मेहमान होते है.
लेकीन यांदे होती है बडी वफादार;
बार बार आकर बनाती दिलको शिकार.
फिर दिल भी होकर यादोंका गुलाम;
घुमने जाता है बीछडे रस्तोंके मकाम.
भेजता है फिर उनही आसुओन्को पैगाम;
आनाही होगा तुम्हे यादोंकी बाहे थाम.

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