Category: Hindi

  • अब मुलाकात नहीं होती…

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    हा, मै मिला हूं उससे, बिल्कुल आप जैसा सोच रहे है वैसा ही था। पूरा पागल, अपने ही धुन में खोया हुआ। लेकीन अब, अब मुलाकात नहीं होती।

  • मन आज़ाद है…

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    मन आज़ाद है। भलेही पैरोमें पड़ी है बेड़ी, वास्तविकता की, फिरभी वह आज़ाद है।

  • बुढ़ापा

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    A Hindi poem about an old home which is dilapidated. #poetrylove हर रोज़ सुबह जब मैं मेरे कमरेकी खिड़की खोलता हूँ, तो यही एक सवाल हमेशा होता है। के ये कौन है जो एक आंखसे हमेशा मुझको तांकते है।

  • सड़कके किनारे…

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    मई की भरी दोपहर में, जब चलता हु उन तपती मैली सड़कोपर, मनमे ख़याल आता है, कई हस्तियाँ चली होंगी, उम्र से लम्बी इन सड़कोपर.. कई सपने चूर होक बिखरे होंगे, इसकी धुंदलीसी गलियोंके हर मोड़ पर, किसीने उम्मिदकी किरणका हात थामे, यहिंसे मंझिलकी ओर कदम बढाया होगा. किसी मजनूने हसी राज बांटे होगे, इसी…

  • मुख़्तसरसी बात है…

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    मुख़्तसरसी बात है, तू जो सूनले तो मैं केह दु। तेरी होठोंकी लालिसे, और आँखोंकी गहराईपे, ना कोई नझ्म लिख दु, मुख़्तसरसी बात है… [Read more]

  • लगन

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    है अगर दिलमे कोई लगन अपने, उठ खड़ा हो, कर पुरे सारे सपने. हो हिम्मत अगर जिगरमे तेरी, भर तू ताकत अपने पंखोमे पूरी. नहीं चलना है तुम्हे इस जमींपे लेहेराना है परचम अपना गगनपे…

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