मुख़्तसरसी बात है…

मुख़्तसरसी बात है, तू जो सूनले तो मैं केह दु। तेरी होठोंकी लालिसे, और आँखोंकी गहराईपे, ना कोई नझ्म लिख दु, मुख़्तसरसी बात है... [Read more]

आस

लागली ग आज पहा, धार पाऊस संतत, तुला जमेना यायला, हीच मनी आहे खंत... [ Read more on https://adisjournal.com/aas/ ]

दूर सफरीला जावं

एका शांतशा संध्येला, मन मनात म्हणालं, दूर क्षितिजाच्या पार, जरा सफारीला जावं. वाऱ्यावर आला गंध, होते मन उल्हासित, त्याचा माग ते काढत, पक्षी होऊन उडावं. उंच झाडांच्या शेंड्याला, घरट्यात उतरावं, खाली वाकून पाहता, सरितेने बोलवावं. नदीसंगे जरा जावे, दरीतून वाहवत, डोंगराच्या पाठी येता, पायवाटेवर यावं. लाली आभाळा चढता, डोंगराच्या माथी जावं, सूर्य अस्ताला जातांना, संगे... Continue Reading →

सोहळा

Beauty of our mother earth always shows variety of shades, but as soon as the month of Shravan comes around, beautiful wet greenery shining sunshine spreads all over. This poem is all about this gorgeous beauty of Nature.

बारीश और तुम #३

धुँवाधार बारिश है ये, थमने का कुछ नाम नही, पहाडोसे बिछड़नेपर, शायद फुटके रो रही। हम तुम भी तो बिछड़े है, महीनोसे ना मिल पाए, इन बरसते बादलसीही, क्या तुमभी बेहाल हो? जब हवा बादल उड़ा लाई, तबसे ये है जान गए, मुलाकात अब पहाड़की, अगले साल ही नसीब है। ये कंबख्त नौकरी जब, दूरी हममें डालती है, आहे... Continue Reading →

बारीश और तुम #२

कल रातकी बारिश कुछ बूंदे छोड गयी है, वहा खिडकीकी चौखटपर , मेरी कलाई की घडी मे फसी तुम्हारे कुर्तेके कुछ रेशमी धागों जैसी। मेरे कंधेपे सर रखकर अपनी उँगलिसे मेरे सिनेपे तुमने जो लिखे थे, वो अल्फाज अपने नाजुक हाथोंमें समेटे, देखो वो पल घूम रहे है मेरे इर्दगिर्द। जालीम हवा झोका कुछ बुंदोंको... Continue Reading →

बारीश और तुम #१

A post shared by aditya (@adisjournal) on Jun 20, 2017 at 2:21am PDT हर पल जब असमान से कुछ बुंदे मेरे उपर गिरती है, दिल के किसीं कोनेसे तुम्हारी आवाज आती है। मेरा गिला बदन तुम्हारी यादोसे मेहेकता है, मानो महिनोसे झुलसे हुए मिट्टीपे पेहेली बारिश गिरी है। कभी बिजली कडकती है, और मै भी... Continue Reading →

My prism

I had lost my precious prism, which, from a temple, I had stolen. Since then, Butterflies from my eyes flew off and they are gone, Dousing the sparkle on dewdrops that once brightly shone Now grass is just green and sky is a blue shallow, And my fellow humans had lost their rainbow glow. Yesterday,... Continue Reading →

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