आँसू

खायी है जख्म गहेरी, भरा नहीं है घाव अभी. चेहेरेसे नकाब हसिका, फिरभी नहीं उतरा कभी. चलते रहे बरसातोमे, आसुओंको छुपाते हुए. ना दिखे कभी